प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उत्तराखंड के सभी जनपदों में विशेष प्रसवपूर्व जांच सत्र एवं जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। राज्य सरकार एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संयुक्त प्रयासों से आयोजित इस विशेष अभियान में हजारों गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईंप्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस के दौरान राज्य में कुल 6,997 गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व जांच सेवाएं प्रदान की गईं। इनमें 4,021 महिलाओं को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और 3,129 महिलाओं को अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं दी गईं।
अभियान के दौरान 709 उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान की गई, जबकि 748 महिलाओं को अल्ट्रासाउंड सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। साथ ही 613 उच्च जोखिम मामलों का प्रबंधन एवं समयबद्ध रेफरल सुनिश्चित किया गया।राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य में प्रथम तिमाही पंजीकरण, प्रसवपूर्व जांच कवरेज, संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल जैसे प्रमुख मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है।स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियानएवं अन्य मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों के समन्वित क्रियान्वयन ने इस सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व, समय पर जांच और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के माध्यम से राज्य में उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान और प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिली है।स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि नियमित एएनसी जांच, विशेषज्ञ परामर्श एवं प्रभावी रेफरल प्रणाली के कारण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है।
स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय ने बताया कि डिजिटल निगरानी, पोर्टल आधारित ट्रैकिंग एवं सशक्त रेफरल व्यवस्था के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया गया है।
मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डा संदीप तिवारी ने कहा कि उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की रियल-टाइम मानिटरिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने और मातृ मृत्यु दर को और कम करने के लिए विभाग निरंतर कार्य कर रहा है।
