राज्य कर विभाग की केंद्रीयकृत आसूचना इकाई (सीआईयू) ने शुक्रवार को वर्क कॉन्ट्रैक्ट और आईटी सेक्टर में कार्यरत सात फर्मों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर बड़े पैमाने पर फर्जी आईटीसी घोटाले का पर्दाफाश किया। जांच में सामने आया कि ये फर्में बिना किसी वास्तविक माल सप्लाई के फर्जी बिलों के आधार पर जीएसटी चोरी कर रही थीं। प्रथम दृष्टया विभाग को लगभग 4.75 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होने की पुष्टि हुई है।कई आपूर्तिकर्ता फर्मों का खरीद बैकअप भी उपलब्ध नहीं मिला, जो फर्जी सप्लाई चेन की ओर इशारा करता है। अधिकतर फर्में अपने पते पर भी नहीं मिलीं। जांच टीमों ने पाया कि जिन प्रतिष्ठानों पर व्यापार दिखाया गया था, उनमें से कई अपने घोषित पते पर मौजूद ही नहीं थीं। इससे फर्जी बिलिंग का नेटवर्क और स्पष्ट हुआ।सीआईयू की टीम ने ई-वे बिल और जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध डाटा का विश्लेषण किया, जिसमें कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। जिन वाहनों पर ई-वे बिल जारी किए गए थे, वे बिल की तिथि पर किसी भी टोल प्लाजा से गुजरे ही नहीं, जिससे पूरे कारोबार पर संदेह गहरा गया।

