उत्तराखंड में राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (गोल्डन कार्ड) के तहत चिकित्सा दावों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बड़ा निर्णय लिया गया है। प्रदेश में गोल्डन कार्ड योजना इस समय संकट में चल रही है। कारण यह कि स्वास्थ्य प्राधिकरण को इस योजना के तहत निजी अस्पतालों के 100 करोड़ से अधिक के दावों का भुगतान करना है। इस समस्या को देखते हुए शुक्रवार को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण कार्यालय के अध्यक्ष अरविंद सिंह ह्यांकी ने गोल्डन कार्ड योजना की समीक्षा की। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को निर्देश जारी किए हैं कि अब प्रत्येक लाभार्थी मरीज से डिस्चार्ज के समय फीडबैक फार्म अनिवार्य भरवाया जाएगा। लाभार्थी के हस्ताक्षरयुक्त फीडबैक फार्म के बिना किसी भी चिकित्सा दावे पर विचार नहीं होगा और भुगतान रोका जाएगा।निर्णय लिया गया कि जिस प्रकार आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में डिस्चार्ज के समय मरीजों से फीडबैक लिया जाता है, उसी प्रकार का फीडबैक गोल्डन कार्ड से इलाज कराने वाले मरीजों से भी लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त उपचारित लाभार्थियों से रैंडम आधार पर फोन कर फीडबैक फार्म में दर्ज विवरणों की पुष्टि भी की जाएगी। इस कदम से स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभार्थियों को उपचार संबंधी पूरी जानकारी सुनिश्चित हो सकेगी।

