विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं और किताबों तक सीमित रखने के बजाय आम जनमानस के रोजमर्रा के जीवन से जोड़ना आज के दौर की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह बात उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को देहरादून स्थित आई.आर.डी.टी. सभागार में आयोजित विशेष सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के तत्वावधान में आयोजित “Mainstreaming Science, Technology and Innovation for a Prosperous Uttarakhand” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया और राज्य के तकनीकी व वैज्ञानिक विकास का खाका प्रस्तुत किया।मुख्यमंत्री धामी ने घोषणा करते हुए कहा कि देहरादून में स्थापित हो रही देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है, जो उत्तराखंड को विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाएगी।मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, जीआईएस-आधारित डैशबोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इंफॉर्मेशन सेंटर और स्टेम लैब्स जैसी आधुनिक सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया, नेशनल क्वांटम मिशन और सेमीकंडक्टर मिशन भारत को वैश्विक तकनीकी महाशक्ति बना रहे हैं, जिसमें उत्तराखंड अपनी अग्रणी भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि प्रदेशभर के दूर-दराज और पर्वतीय क्षेत्रों के स्कूली विद्यार्थियों को नियमित रूप से साइंस सिटी का भ्रमण कराया जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह के एक्सपोजर से बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान और नवाचार की भावना जागृत होगी, जो भविष्य के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की नई पीढ़ी तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगी।
