उत्तराखंड सरकार ने राज्य को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे ले जाने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी। हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए नीति में कई तरह की रियायतें दी गई हैं।सोलर, पवन या अन्य नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों से प्राप्त बिजली का इस्तेमाल करने पर हरित हाइड्रोजन उत्पादकों को उस बिजली पर लगने वाले टैक्स, अतिरिक्त सरचार्ज व क्रास सब्सिडी सरचार्ज में छूट का विषय कैबिनेट की बैठक में उठा। इसी तरह हाइड्रोजन प्लांट को प्राकृतिक-नवीकरणीय ऊर्जा से मिलने वाली बिजली पर राज्य के भीतर ट्रांसमिशन शुल्क और व्हीलिंग शुल्क में छूट पर भी चर्चा हुई।
*सौर, पंप स्टोरेज और जलविद्युत परियोजनाओं को राज्य की मौजूदा नीतियों के तहत जो प्रोत्साहन मिलते हैं, वही प्रोत्साहन हरित हाइड्रोजन संयंत्रों को बिजली देने के लिए लगाए जाने वाले नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों पर भी लागू होंगे।*सरकार हरित हाइड्रोजन संयंत्रों को भी एक उद्योग मानेगी। इसका फायदा यह होगा कि ऐसे संयंत्रों को राज्य की दूसरी औद्योगिक इकाइयों की तरह ही सरकारी सुविधाएं और मदद मिलेगी।*इब्रिड वाहनों की तरह मोटर वाहन कर (रोड टैक्स) में छूअगर आगे चलकर हरित हाइड्रोजन से चलने वाले वाहन सड़कों पर आते हैं, तो राज्य सरकार उन्हें इलेक्ट्रिक, सोलर, सीएनजी और हाट देने पर विचार करेगी।*हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं का आवंटन सरकारी कंपनियों को नामांकन के आधार पर, जबकि निजी कंपनियों को बोली के जरिए किया जाएगा। इससे निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी व परियोजनाओं को गति मिलेगी।*सभी आवश्यक मंजूरी समय पर दिलाने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस की व्यवस्था की जाएगी। यूपीसीएल और पिटकुल यह सुनिश्चित करेंगे कि इन संयंत्रों को लगातार और अच्छी गुणवत्ता की बिजली मिलती रहे।

