starry sky and crescent
उल्कावृष्टि यानी आसमानी आतिशबाजी का शानदार नजारा कल शुक्रवार की रात देखने को मिलेगा। इसमें 150 प्रति घंटे की रफ्तार से सैकड़ों जलती उल्काओं को देखे जाने की संभावना है। क्षुद्रग्रह (एस्टेरायड) 3200-फेथान द्वारा छोड़े गए मलबे के कारण यह खगोलीय घटना होती है। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल के वरिष्ठ खगोल विज्ञानी डा. शशिभूषण पांडेय ने बताया कि इस खगोलीय घटना को जेमिनीड मेट्योर शावर नाम से जाना जाता है।दक्षिण की अपेक्षा उत्तरी गोलार्ध में यह उल्कावृष्टि बेहतर देखने को मिलती है। कम रोशनी वाले ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों से इस घटना का अधिक शानदार नजारा दिखता। 13 व 14 दिसंबर की रात को हर साल यह खगोलीय घटना घटित होती है। खगोल प्रेमियों को बेसब्री से इस घटना का इंतजार रहता है।

