फसाद या अशांति फैलाने वाले पर नकेल कसने के लिए धामी सरकार दंगारोधी कानून के तहत सरकारी और निजी चल या अचल संपत्ति के नुकसान की ही भरपाई नहीं करेगी, बल्कि दंगा-फसाद पर काबू पाने के लिए सरकारी मशीनरी का जो खर्च होगा, वह भी दंगाइयों से वसूला जाएगा। कानून के तहत गठित होने वाले दावा अधिकरण (ट्रिब्यूनल) ने एक बार फैसला सुना दिया तो उसके खिलाफ न कोई अपील हो सकेगी न सुनवाई। अधिकरण का फैसला अंतिम होगा। उसके आदेश के विरुद्ध किसी भी न्यायालय में अपील नहीं हो सकेगी। जहां दावा अधिकरण गठित हो जाएगा, वहां किसी सिविल न्यायालय को प्रतिकर के किसी दावे से संबंधित किसी प्रश्न को अंगीकृत नहीं कर सकेगा।धामी सरकार में यह तीसरा सबसे सख्त कानून बनाए जाने का दावा किया जा रहा है। इससे पहले प्रदेश में नकलरोधी कानून लागू किया गया। कानून में आजीवन कारावास और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया। जानकारों के मुताबिक, नकल रोकने के लिए देश में इससे सख्त कानून नहीं है। धामी सरकार ने दूसरा सबसे बड़ा फैसला समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को मंजूरी देने का है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जिसकी विधानसभा ने यूसीसी विधेयक को मंजूरी दी।

