7 or 8 years old sweet kid in uniform carrying bag full of books feeling upset and complaining about the weight of the backpack in lazy schoolboy unhappy about going back to school
उत्तराखंड के सरकारी और निजी विद्यालयों में बस्ते के बोझ को कम करने के लिए साल में दस दिन बस्ता मुक्त दिवस रहेगा। शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत के मुताबिक हर महीने के अंतिम शनिवार को यह योजना लागू होगी। इस योजना के तहत छात्र-छात्राएं बिना बस्ते के स्कूल जाएंगे। जहां वह अपनी रूचि के अनुसार विभिन्न गतिविधियों में प्रतिभाग कर सकेंगे।राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रदेश के सभी विद्यालयों में बस्ता मुक्त दिवस योजना लागू की जा रही है। योजना उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा छह से कक्षा-12 वीं तक लागू की जाएगी। प्रदेश के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में यह योजना पहले से ही ‘प्रतिभा दिवस’ के रूप में संचालित की जा रही है। जिसके तहत भाषा, गणित विज्ञान, खेलकूद, कला, क्राफ्ट, श्रम के कार्य व व्यायाम, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अभिरूचि की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सिफारिश के आधार पर सभी तरह के विद्यालयों में साल में 10 दिन बस्ता मुक्त दिवस मनाए जाने की मंजूरी दी गई है। जिसका प्रमुख उद्देश्य बच्चों के बस्ते के बोझ को कम करना, विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से छात्रों में निहित प्रतिभाओं का समुचित विकास करना, स्थानीय व्यवसायों एवं हस्त शिल्प संबंधी कौशल विकास के साथ ही श्रम के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। शिक्षा मंत्री के मुताबिक विभागीय प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस संबंध में शासनादेश होते ही योजना लागू की जाएगी। जिसकी जिम्मेदारी हर जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी की होगी।

