किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ होने से उत्तराखंड को ऊर्जा संकट से निपटने में बड़ी राहत मिलेगी। प्रदेश को इससे लगभग 220 मेगावाट बिजली उपलब्ध होगी।परियोजना के अंतर्गत पावर प्लांट के निर्माण का खर्च उत्तराखंड और हिमाचल मिलकर उठाएंगे। उत्तराखंड को खर्च के लिए केंद्र की ओर से वित्तीय सहायता देने पर सहमति बनी है।15 हजार करोड़ लागत से किशाऊ बहुद्देश्यीय परियोजना से 442 मेगावाट विद्युत उत्पादन होना है। इस परियोजना के बनने से उत्तराखंड समेत छह राज्य हिमाचल, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान लाभान्वित होंगे।उत्तराखंड व हिमाचल को कुल उत्पादित बिजली का 50-50 प्रतिशत मिलेगा, जबकि अन्य चार राज्यों की बांध से मिलने वाले पानी में हिस्सेदारी रहेगी। किशाऊ एशिया में टिहरी बांध के बाद दूसरा सबसे बड़ा बांध होगा।इसकी ऊंचाई 235 मीटर प्रस्तावित है। टिहरी बांध की ऊंचाई 260 मीटर है। उत्तराखंड में देहरादून जिले और हिमाचल के सिरमौर जिले में यमुना की सहायक नदी टोंस पर इस परियोजना के निर्माण में हिमाचल की ओर से अड़ंगा लगा हुआ था।
जलविद्युत सरप्लस हिमाचल ने इस परियोजना पर होने वाले वित्तीय व्ययभार को उठाने में असमर्थता व्यक्त की थी। मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में स्टेकहोल्डर सभी राज्यों के साथ बैठक में इस परियोजना को लेकर लंबे समय से बना गतिरोध टूट गया।इस गतिरोध के चलते परियोजना की लागत 11500 करोड़ से बढ़कर 15 हजार करोड़ हो चुकी है। वर्ष 1944-45 में इस परियोजना की परिकल्पना की गई, लेकिन वर्ष 1965 में इसकी पहली डीपीआर तैयार हो सकी।
