सिलक्यारा सुरंग के ऊपर वर्टिकल ड्रिलिंग का काम जारी है। अभी तक 30 मीटर तक ड्रिलिंग कर ली गई है। वहीं सुरंग के अंदर फंसे ऑगर मशीन के ऑगर (बरमे) को बाहर निकाल लिया गया है। अब यहां मैन्युअल ड्रिलिंग का काम शुरू किया जाएगा, जो कि भारतीय सेना की इंजीनियरिंग बटालियन मद्रास सेपर्स की निगरानी में आगे बढे़गा। यहां मैन्युअल ड्रिलिंग के लिए रैट माइनिंग विधि अपनी जाएगी, जिसमें छोटी-छोटी सुरंगे खोदी जाती हैं, कोयले की खदान में इस तरह की सुरंगें बनाई जाती है।सिलक्यारा सुरंग के ऊपर सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड(एसजेवीएनएल) की टीम ने वर्टिकल ड्रिलिंग शुरू की। यहां 1.5 मीटर व्यास में ड्रिल मशीन की रिक से ड्रिलिंग शुरु की। जिससे दोपहर बाद तक 15 मीटर तक ड्रिलिंग शुरु कर दी है। एनएचआईडीसीएल के एमडी महमूद अहमद ने बताया कि सुरंग के ऊपर एसजेवीएनएल की टीम से 1.2 मीटर व्यास में वर्टिकल ड्रिलिंग शुरू कर दी है। कुल 86 मीटर तक ड्रिलिंग होनी है। जिसमें दो दिन का समय लग सकता है। बताया कि एक ड्रिलिंग रिक की क्षमता 40 मीटर ड्रिल की है। जिसके बाद रिक को बदला जाएगा।बीते शुक्रवार शाम को सुरंग के अंदर फंसे मजदूर के बचाओ अभियान को तब झटका लगा था, जब ऑगर मशीन से ड्रिलिंग करीब 12 मीटर ही बची थी। लेकिन ड्रिलिंग के दौरान मशीन का ऑगर(बरमा) के ब्लेड सरियों व लोहे के पाइप में उलझ कर फंस गए, इसे निकालने का प्रयास किया गया तो यह अंदर ही टूट गए। इसके बाद डीआरडीओ हैदराबाद से वायुसेना के डोर्नियर विमान से लेजर कटर और चंडीगढ़ से प्लाज्मा कटर मंगवाया गया। साथ ही ओएनजीसी की एक टीम को भी आंध्रप्रदेश के राजामुंदरी से बुलाया गया।

