पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण और नरेश चंद्र द्विवेदी को पासपोर्ट धोखाधड़ी के करीब 15 साल पुराने मामले में देहरादून की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई संदीप सिंह भंडारी की अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया। बालकृष्ण पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के लिए कथित कूटरचित दस्तावेज इस्तेमाल करने, जबकि नरेश चंद्र द्विवेदी पर प्रमाणपत्र में कूटरचना करने का आरोप था।सीबीआई ने बालकृष्ण के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 471 और पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 (1)(बी), जबकि नरेश चंद्र द्विवेदी के खिलाफ आईपीसी की धारा 466 के तहत आरोप लगाए थे। मामला अखिल भारतीय संत समिति के तत्कालीन अध्यक्ष आचार्य प्रमोद कृष्णन की शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायत में बालकृष्ण की नागरिकता और भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों पर सवाल उठाए गए थे।फैसले के बाद अदालत से निकलते हुए आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हमारा न्याय व्यवस्था में पूर्ण विश्वास था और है। एक न्यायिक प्रक्रिया थी जिससे गुजरकर हमें न्याय मिला है। लंबा वक्त मानसिक रूप से थकाने वाला था।
