बारिश से नदियों का जल स्तर बढ़ा है। हरिद्वार में गंगा चेतावनी निशान से ऊपर बह रही है। बृहस्पतिवार दोपहर एक बजे गंगा चेतावनी निशान 293 से भी ऊपर पहुंच गई। गंगा का जलस्तर 293.30 दर्ज किया गया। खानपुर में भी गंगा चेतावनी रेखा पार कर गई है। जिला प्रशासन ने निचले इलाकों के लिए अलर्ट घोषित किया है। वहीं, ऋषिकेश की बात करें तो सिंचाई विभाग के अनुसार गंगा 339.90 मीटर पर बह रही है, जो चेतवानी रेखा से 25 सेमी ऊपर है। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट और परमार्थ निकेतन का आरती स्थल पूरी तरह जलमग्न हो गया है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदी का जल स्तर भी खतरे के जल स्तर के बेहद करीब पहुंच गया। चमोली जिले में तीन बजे तक अलकनंदा, नंदाकिनी और पिंडर नदी का जल स्तर चेतावनी स्तर के पास पहुंच गया। शाम चार बजे सीमांत जिले पिथौरागढ़ में काली नदी का जल स्तर भी काफी बढ़ा हुआ मिला। गोरी और सरयू नदी का जल स्तर भी खतरे के जल स्तर के पास पहुंचा हुआ था।मानसून सीजन में पहली बार गंगा का जलस्तर चेतावनी रेखा को पार कर गया। इस सीजन में अब तक का सबसे अधिक 01.67 लाख क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। जिला प्रशासन ने निचले इलाकों के लिए अलर्ट घोषित किया है। बृहस्पतिवार को दोपहर एक बजे गंगा चेतावनी निशान 293 से भी ऊपर पहुंच गई। गंगा का जलस्तर 293.30 दर्ज किया गया। खानपुर में भी गंगा चेतावनी रेखा पार कर गई है।मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी रखी जाएं। डैम, बैराजों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पूर्व सूचना देकर सतर्क किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर सीमावर्ती राज्यों को भी समय रहते अलर्ट किया जाए ताकि किसी भी संभावित जोखिम को न्यूनतम किया जा सके। मुख्य सचिव बर्द्धन ने यह निर्देश राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी सभी चेतावनियां और अलर्ट अंतिम छोर पर रहने वाले व्यक्ति तक भी समय पर पहुंचना सुनिश्चित किया जाए। समय पर सूचना ही लोगों को सुरक्षित निर्णय लेने का अवसर देती है। जिला, ब्लॉक, तहसील और ग्राम स्तर तक सूचना प्रसारण तंत्र को और अधिक मजबूत और सक्रिय बनाया जाए।
