सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने बताया कि नोटिस की सुनवाई के दौरान दिए गए बयानों के समर्थन में मतदाता जो भी दस्तावेज देंगे, उनकी आयोग स्वतंत्र रूप से जांच कराएगा। मसलन, किसी ने 10वीं का प्रमाणपत्र दिया है तो संबंधित बोर्ड से उसका सत्यापन कराया जाएगा। कोई भी दस्तावेज झूठा, मनगढ़ंत, गलत पाया जाता है तो बीएनएस और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है।भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-217 के तहत कार्रवाई होगी। ये धारा किसी लोक सेवक (सरकारी अधिकारी या पुलिस) को नुकसान पहुंचाने के इरादे से उसे जानबूझकर झूठी या गलत सूचना देने से संबंधित है। यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए कि सूचना झूठी है, किसी सरकारी अधिकारी को ऐसी जानकारी देता है, जिससे वह अधिकारी किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान या परेशानी पहुंचाए तो उसे एक साल की कैद, 10 हजार रुपये जुर्माना या दोनों हो सकता है। इसके अलावा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 के तहत भी कार्रवाई हो सकती है। यह धारा झूठी घोषणाएं करने से संबंधित है, जिसके तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए लिखित रूप में गलत जानकारी देना एक दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
