Black woman in handcuffs
नकली दवा माफिया के खिलाफ उत्तराखंड एसटीएफ की कार्रवाई अब राष्ट्रीय स्तर पर असर दिखाने लगी है।अधिकारियों का मानना है कि इनसे पूछताछ के बाद उत्तराखंड समेत कई राज्यों में फैले नकली दवाओं के नेटवर्क, सप्लाई चेन और उससे जुड़े कारोबारियों के नाम सामने आ सकते हैं। पिछले सप्ताह उत्तराखंड एसटीएफ ने ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया था, जो नामी कंपनियों की जीवनरक्षक दवाओं की हूबहू नकल तैयार कर बाजार में बेच रहा था।गिरोह केवल पैकेजिंग की नकल नहीं कर रहा था, बल्कि इस तरह से दवाएं तैयार कर रहता था कि मेडिकल कारोबारी भी असली और नकली में अंतर नहीं कर पाते थे। कार्रवाई के दौरान एसटीएफ ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में कोटद्वार स्थित एक फैक्ट्री को सील किया गया, जबकि रुड़की स्थित एक अन्य इकाई से नमूने लेकर परीक्षण के लिए भेजे गए। यहीं से राजफाश हुआ कि यह कोई स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला संगठित नेटवर्क है। उत्तराखंड में शुरू हुई जांच की कड़ियां अब बिहार के गया तक पहुंच गई हैं, जहां पुलिस ने नकली दवाओं के कारोबार से जुड़े आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया है।इनमें दो ऐसे आरोपित विकास कुमार निवासी पिपरपांती और कुणाल कुमार निवासी मानपुर कर्मी टोला भी शामिल हैं जिनकी तलाश उत्तराखंड एसटीएफ लंबे समय से कर रही थी। एसटीएफ दोनों आरोपितों को बी-वारंट पर देहरादून लाकर पूछताछ करेगी।
