होपलो कीट के प्रकोप से देहरादून वन प्रभाग के साल के करीब 25 हजार पेड़ों का कटान तय है। कीटों की रोकथाम के लिए देर-सबेर यह प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। इसी के साथ होपलो के अत्यधिक प्रकोप के कारणों को जानने में भी अधिकारी जुटे हैं। अधिकारियों के अब तक के अनुमान के अनुसार वर्ष 2025 में मानसून की मजबूत स्थिति ने होपलो कीट को संरक्षण दिया।देरादून के प्रभागीय वनाधिकारी नीरज कुमार के मुताबिक वर्ष 2025 में दून में मानसून का ग्राफ करीब 28 प्रतिशत सामान्य से अधिक रहा। इसके साथ ही लंबे मानसून से फंगस बढ़ता है और लकड़ी नरम पड़ती है। जिससे लार्वा को उसमें घुसने में मदद मिलती है। साथ ही वर्षा के कारण होपलो के प्राकृतिक शत्रुओं जैसे चिड़िया आदि की अनुपस्थिति रहती है। इस तरह के कारकों में लार्वा को जीवित रहकर वयस्क बनने में मदद मिलती है।वर्षा के कुछ ऐसे दौर भी आए, जब नमी की मात्रा अत्यधिक हो गई। जब नमी अधिक होती है तो लार्वा को पनपने के लिए अनुकूल वातावरण मिल जाता है।

