Judge’s gavel, Themis sculpture and collection of legal books on the brown background.
कोर्ट ने कहा कि यदि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक सहमति से संबंध रहे हों तो केवल विवाह न हो पाने के आधार पर सहमति को अवैध नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार मसूरी की एक युवती ने पुलिस में शिकायत की थी एक युवक ने उससे शादी का झांसा देकर संबंध बनाए हैं। युवती के अनुसार आरोपी ने 45 दिनों के भीतर शादी करने का आश्वासन दिया था लेकिन बाद में मुकर गया।कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी का इरादा शुरू से ही शादी नहीं करने का था।कोर्ट ने कहा कि बिना पर्याप्त साक्ष्य के आपराधिक मुकदमे को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने देहरादून की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में लंबित आपराधिक कार्यवाही और 22 जुलाई 2023 की चार्जशीट को रद्द कर दिया।

