राजभवन सभागार में उत्तराखंड में सुरक्षा और पर्यावरण चुनौतियां तथा पर्यटन विषय पर विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने बतौर मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया।राज्यपाल ने कहा कि हमें आज संकल्प लेना है कि हम उत्तराखंड में द्वितीय पंक्ति के सुरक्षा प्रहरी के रूप में सेवा करेंगे, पर्यावरण की रक्षा के लिए हम देवभूमि के प्राचीन संतों की तरह आचरण करेंगे तथा पर्यटन के उत्थान में हम अतिथि देवो भवः की अवधारणा को आत्मसात करेंगे। विशेष कर युवाओं और पूर्व सैनिकों को इसका दृढ़ निश्चय होकर संकल्प लेना चाहिए। मन में सभी को यह गांठ बांध लेनी चाहिए कि यदि राष्ट्र होगा तो समाज होगा, समाज होगा तो परिवार होगा।उन्होंने मैती आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि एक वर्ष में बहुत सी शादियां होती है अगर सभी वर-वधु एक-एक पेड़ भी लगाएं व उसको बचाएं तो एक वर्ष में ही बहुत से पेड़ों का रोपण हो जाएगा, जो हरियाली बढ़ाने में उपयोगी होगा। उन्होंने लोगों को भावनात्मक रूप से मैती आंदोलन से जुड़ने की अपील की।उत्तराखंड में पर्यटन की संभावना विषय पर कमांडर दीपक खंडूरी ने कहा कि उत्तराखंड में ग्रामीण पर्यटन, पारिस्थितिकी पर्यटन, झील पर्यटन, वैलनेस पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन, एंग्लिंग पर्यटन, वन्यजीव पर्यटन जैसे अनेक पर्यटन आयाम तेजी से विकसित हो रहे हैं।उन्होंने उदाहरण दिया कि किस प्रकार से मुगलों और अंग्रेजों ने हमारे स्वाभिमान और हमारे मूल्यों पर कुठाराघात किया। इसलिए हमें एकता और आपसी तालमेल से राष्ट्र के उत्थान और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करना होगा। इसीलिए हमें अपनी चुनौतियों, अपनी खूबियों और अपनी मर्यादा की सीमा पता होनी चाहिए।

