सौर ऊर्जा परियोजनाएं लगाने में आ रहीं दिक्कतों के बीच अब यूपीसीएल की बजट की बाधा दूर होगी। इसके लिए सरकार ने मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना से संबंधित अधिसूचना में संशोधन कर दिया है। कई जिलों में सौर परियोजनाओं की भारी मांग के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर की दिक्कत के चलते ये बदलाव किए गए हैं।पूर्व के नियमों के तहत ये प्रावधान थे कि 50 किलोवाट क्षमता तक की सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में 300 मीटर हवाई दूरी और मैदानी क्षेत्रों में 100 मीटर हवाई दूरी तक के सोलर पावर प्लांट आवंटित किए जाएंगे। हवाई दूरी के संबंध में उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के मानक के हिसाब से ही कार्रवाई होती थी। कई जिलों में इतने सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट आवंटित हो गए कि यूपीसीएल का इंफ्रास्ट्रक्चर कम पड़ गया। लिहाजा, ऊर्जा विभाग ने इसके नियमों में बदलाव कर दिया।डीएम मेहरबान सिंह बिष्ट की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जिले में सोलर प्रोजेक्ट के लिए लगातार आवेदन आ रहे हैं। छह सब स्टेशन ऐसे हैं, जिनकी टीएफआर यूपीसीएल नहीं दे रहा है। न तो सब स्टेशन की क्षमता बची है और न ही फीडर भी लोड उठाने की स्थिति में हैं। इस वजह से उरेडा भी प्रोजेक्ट आवंटित नहीं कर रहा है।

