देवभूमि उत्तराखंड में दिव्यांगजनों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश के प्रतिभावान दिव्यांग युवाओं को देश और राज्य की शीर्ष प्रशासनिक सेवाओं में स्थान दिलाने के लिए ‘निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग योजना’ की औपचारिक शुरुआत की गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग अभ्यर्थियों को समान अवसर प्रदान करना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनके सिविल सेवक बनने के सपनों को साकार करना है। इस योजना के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की राज्य प्रशासनिक परीक्षाओं के लिए पूरी तरह से मुफ़्त आवासीय व गैर-आवासीय कोचिंग दी जाएगी। शुरुआत में इस विशेष कोचिंग सेवा को प्रदेश के दो प्रमुख शहरों में स्थापित केंद्रों के माध्यम से शुरू किया गया है।कोचिंग की गुणवत्ता को उच्च स्तरीय बनाए रखने के लिए देश और राज्य के ख्यातिलब्ध विषय विशेषज्ञों को जोड़ा गया है। पूर्व आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS), और राज्य सिविल सेवा (PCS) के अधिकारी अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन और इंटरव्यू गाइडेंस देंगे।योजना में पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। अभ्यर्थी उत्तराखंड का स्थायी/मूल निवासी होना अनिवार्य है। अभ्यर्थी के पास कम से कम 40% या उससे अधिक की प्रमाणित दिव्यांगता होनी चाहिए। यूपीएससी या यूकेपीएससी की पात्रता के अनुसार अभ्यर्थी किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण या अंतिम वर्ष में होना चाहिए। परिवार की वार्षिक आय राज्य सरकार द्वारा निर्धारित गरीबी रेखा व अन्य श्रेणीगत मानकों के भीतर होनी चाहिए।
