बदरीनाथ के सरकारी अस्पताल के प्रभारी डॉ. सचिन राणा ने बताया कि कुंड का पानी प्राकृतिक रूप से गर्म और सल्फरयुक्त है। तप्तकुंड क्षेत्र में गर्म हवाओं के कारण ऑक्सीजन का दबाव भी कम रहता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को अधिकतम दो से तीन डुबकी लगाने के बाद कुंड से बाहर आने की सलाह दी। डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। चिकित्सकों के अनुसार, कुंड में प्राकृतिक रूप से निकलने वाले सल्फरयुक्त गर्म पानी में ज्यादा देर तक स्नान करना घातक हो सकता है। इससे चक्कर आने, मूर्छा आने और हृदय संबंधी परेशानी का खतरा बढ़ता है।
