देहरादून में पारा 10 डिग्री गिरा प्री-मानसून बारिश ने जहां भीषण गर्मी से लोगों को बड़ी राहत दी है, वहीं कई क्षेत्रों में ठंड लौटने से लोगों को फिर से गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है। जेठ के महीने में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम फागुन जैसा सुहावना हो गया है। राजधानी देहरादून में रविवार को अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 10 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया। लंबे समय बाद शहर में दिन के समय भी हल्की ठंडक महसूस की गई।उत्तराखंड में इस बार ग्रीष्मकाल ‘ठंडा’ रहा। नियमित अंतराल में हुई वर्षा ने पूरे सीजन में चंद दिन ही गर्मी का एहसास होने दिया।तीन माह के इस सीजन में प्रदेश में औसत वर्षा सामान्य से 27 प्रतिशत अधिक हुई। मई में पूरे माह सामान्य से 50 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। अब एक जून से मानसून सीजन माना जाता है। मौसम विभाग के अनुसार, एक मार्च से 31 मई तक ग्रीष्मकालीन मौसम में प्रदेश में 202 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 158 मिमी मानी जाती है।मौसम विज्ञानियों का मानना है कि पश्चिमी विक्षोभों की सक्रियता और प्री-मानसून गतिविधियों के कारण इस वर्ष मार्च से मई के दौरान वर्षा सामान्य से अधिक रही।दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तराखंड पहुंचने से पहले होने वाली वर्षा को प्री-मानसून शावर कहा जाता है। वर्तमान में प्रदेश में हो रही अधिकांश वर्षा इसी श्रेणी में आती है।
मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी जनपदवार वर्षा आंकड़ों के अनुसार राज्य में मई 2026 के दौरान 96.7 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई, जबकि सामान्य वर्षा 64.7 मिमी मानी जाती है।
इस प्रकार प्रदेश में मई में सामान्य से 50 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज हुई। जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें, तो अधिकांश जनपदों में सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई। सबसे अधिक वर्षा चंपावत में दर्ज की गई, जहां सामान्य से 160 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। वहीं, अल्मोड़ा, टिहरी, ऊधमसिंह नगर, बागेश्वर और पौड़ी में भी सामान्य से 100 प्रतिशत से अधिक वर्षा रिकार्ड की गई।
