मौसम वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है मार्च में पर्वतीय इलाकों में हुई असामान्य बर्फबारी ने । हालांकि यह पहली बार नहीं है कि मार्च में बर्फबारी हो रही है। 26 वर्षों में मार्च में चौथी बार हो रही बर्फबारी की वजह वैज्ञानिक वैश्विक स्तर पर हो रहे जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम चक्र में अस्थिरता को बढ़ना मानते हैं।यही वजह है कि सर्दी और गर्मी के पारंपरिक पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहा है। मार्च में बर्फबारी इसी बदलाव का संकेत मानी जा रही है। आमतौर पर इस समय तक सर्दी का असर कम होने लगता है लेकिन इस वर्ष मौसम ने अलग ही रुख अपनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और जलवायु परिवर्तन इसके प्रमुख कारण हैं।बीते 26 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे पहले साल 2012 में मार्च में 1.3 इंच बर्फबारी हुई थी। इसके बाद साल 2014 में 1.5 इंच और उसके बाद सीधे साल 2020 में 0.7 इंच बर्फबारी रिकॉर्ड की गई थी। करीब छह साल के अंतराल के बाद साल 2026 में इस बार बर्फबारी हुई है।

