पीसीबी की बोर्ड बैठक में फैसला लिया गया है की राज्य में अब नारंगी और हरी श्रेणी के उद्योग के स्थलीय निरीक्षण-सत्यापन कर रिपोर्ट देने का काम थर्ड पार्टी के माध्यम से हो सकेगा। जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) अनुमति प्रदान करेगा। इसका प्रस्ताव पीसीबी की बोर्ड बैठक में पास हो गया है। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों के अधिकारों को बढ़ाया गया है, वे दस करोड़ तक के उद्योगों की स्थापना के लिए अनुमति दे सकेंगे।औद्योगिक इकाई की स्थापना करने से पहले पीसीबी से एनओसी लेनी होती है। स्थापना के बाद संचालन की एनओसी भी पीसीबी के से मिलती है। राज्य में पीसीबी के केवल चार क्षेत्रीय कार्यालय है। इसके अलावा कर्मचारियों की भी कमी है। ऐसे में कामकाज को बेहतर करने और उद्योगों की स्थापना के काम में तेजी लाने के लिए थर्ड पार्टी का सहयोग लेने का फैसला किया गया है।अब नारंगी (दवा निर्माण इकाई, होटल- रेस्त्रां आदि) और हरी श्रेणी (हल्की इंजीनियरिंग इकाई, इलेक्ट्रानिक सामान की असेंबली आदि) श्रेणी की स्थापना और संचालन के दृष्टिगत स्थलीय निरीक्षण और सत्यापन का काम थर्ड पार्टी के माध्यम से हो सकेगा।राज्य में क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से पांच करोड़ तक हरित श्रेणी वाले उद्योग की स्थापना और संचालन के लिए अनुमति देने का अधिकार था। पांच करोड़ से अधिक लागत वाली इकाईयों से जुड़ी प्रक्रिया पीसीबी मुख्यालय के माध्यम से होती थी, पर अब पीसीबी के क्षेत्रीय कार्यालय 10 करोड़ तक की इकाईयों से जुड़ी अनुमति दे सकेंगे। इसके लिए पीसीबी की बोर्ड बैठक में फैसला लिया गया है। इसके तहत पीसीबी आईआईटी कानपुर, इंडियन इं्स्टीट्यूट आफ पेट्रोलियम देहरादून, पंत विश्वविद्यालय पंतनगर, आईआईटी रुड़की और आईआईटी दिल्ली से सहयोग लेगा। इन संबंधित संस्थाओं के विशेषज्ञ इकाईयों का निरीक्षण करने के बाद रिपोर्ट देंगे। इसके बाद एनओसी पीसीबी के माध्यम से जारी हो सकेगी।

