कर्णप्रयाग प्रकरण की चिंगारी गुरुवार रात देहरादून तक पहुंच गई। हिमाचल के पांवटा साहिब से निकले निहंगों का जत्था पुलिस की रणनीति और सुरक्षा घेरा धता बताते हुए उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर गया।पांवटा साहिब में वार्ता विफल होने के बाद निहंगों का एक जत्था कुल्हाल की ओर बढ़ा। सीमा पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की गई, लेकिन जत्था वैकल्पिक मार्गों से आगे निकल गया। इसके बाद पुलिस ने प्रेमनगर, शिमला बाईपास, आईएसबीटी और अन्य संभावित मार्गों पर नाकेबंदी कर दी।इसी कारण पूरे दून में हाई अलर्ट जारी रहा। प्रेमनगर क्षेत्र में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बाद राजधानी देहरादून में हड़कंप मच गया। प्रेमनगर, शिमला बाईपास और शहर के प्रवेश मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। जिलाधिकारी डा. आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल देर रात तक स्वयं मोर्चे पर डटे रहे। पंजाब से आए निहंगों के जत्थे हिमाचल के पांवटा साहिब गुरुद्वारे में आकर रुके थे, जिनसे बात करने के लिए एसडीएम विकासनगर विनोद कुमार, तहसीलदार विवेक राजौरी, नायब तहसीलदार ग्यारुदत्त जोशी, एसपी देहात पंकज गैरोला पांवटा साहिब गुरुद्वारा पहुंचे। वहां कई चरणों में वार्ता के बाद भी बात नहीं बनी।कुल्हाल पहुंचे निहंगों ने कहा कि वे लड़ाई नहीं चाहते, प्यार बढ़ाना चाहते हैं। कर्णप्रयाग घटना में गलती दोनों तरफ से हुई है। समझौता कर इस मामले को रफा-दफा किया जाए। यह भी कहा कि वे कानून व्यवस्था खराब नहीं करना चाहते। उन्होंने गिरफ्तार चारों सिंहों को वापस पंजाब भेजने की मांग करते हुए कहा कि वे हेमकुंड साहिब जाना चाहते हैं। अधिकारियों ने वार्ता के दौरान आश्वासन दिया है कि दो-चार दिनों के अंदर गिरफ्तार निहंगों की जमानत हो जाएगी। इस पर निहंगों ने कहा कि जब तक उनके चार सिंह नहीं मिलेंगे, वे नहीं लौटेंगे।
