Total eclipse of the Sun. The moon covers the sun in a solar eclipse.
मंगलवार को लगने जा रहे सूर्य ग्रहण पर भारतीय सौर मिशन आदित्य एल-वन की नजर होगी, जबकि दुनिया की नजर आदित्य एल-वन पर रहेगी। यह रिंग ऑफ फायर यानी वलयाकार सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है, जो अंटार्कटिका के बर्फीले भूभाग से ही देखा जा सकेगा।आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के पूर्व निदेशक और सौर विज्ञानी डॉक्टर वहाबउद्दीन ने बताया कि आग के छल्ले में लिपटे सूर्य ग्रहण की खगोलीय घटना अद्भुत होती है। इस बार इस खगोलीय घटना को पृथ्वी के एकमात्र स्थान अंटार्कटिका के बर्फीले क्षेत्र से देखा जा सकेगा और दक्षिणी अफ्रीका, चिली समेत अर्जेंटीना में आंशिक सूर्यग्रहण ही देखने को मिलेगाइधर आदित्य एल-वन की नजरें हमेशा सूर्य को देख सकती हैं । लिहाजा आदित्य एल-वन वलयाकार सूर्यग्रहण की तस्वीरें कैमरे में करेगा, जिन्हें बाद में दुनिया देख पाएगी। जिस कारण आदित्य एल वन सौर वैज्ञानिक ही नहीं बल्कि दुनिया के लोगों की नजरें रहेंगी।डॉक्टर वहाबउद्दीन ने बताया कि वलयाकार सूर्यग्रहण की मात्र दो मिनट की रहने वाली हैं, जो अंटार्कटिका के ऊपर दिखाई देगा। भारतीय समय के अनुसार सूर्यग्रहण अपरान्ह 3.26 बजे लगना शुरू होगा। शाम 5.42 बजे सूर्य का सर्वाधिक हिस्सा ग्रहण की चपेट में रहेगा और रात के पहले पहर में 7.57 बजे सूर्य चंद्रमा के साए से मुक्त हो जाएगा। सूर्य ग्रहण 4282 किमी क्षेत्र से होकर गुजरेने जा रहा है। इसका पाथ संकरा है, जो चौड़ाई में करीब 616 किमी का क्षेत्र को कवर कर पाएगा

