मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रोपवे परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए काम में तेजी लाई जा रही है। प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे बेहतर वैकल्पिक परिवहन का साधन है। मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्थाओं को आगामी नौ नवंबर तक रोपवे परियोजनाओं के कार्य धरातल पर शुरू करने के निर्देश दिए हैं।उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।पहले चरण में सोनप्रयाग से केदारनाथ, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब, रानीबाग से हनुमानगढ़ी-कैची धाम, कनकचौरी से कार्तिक स्वामी, जोशीमठ से औली-गोरसों, रैथल से दयारा बुग्याल का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा पुरुकुल से मसूरी तक लगभग 5.2 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य चल रहा है।इससे जहां धार्मिक और पर्यटन स्थलों की पहुंच आसान होगी, वहीं तीर्थाटन, पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। बीते वर्ष 2025 में छह करोड़ से अधिक पर्यटक व तीर्थयात्री पहुंचे हैं। पर्यटक व धार्मिक स्थलों तक सुगम,सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था के लिए सरकार का रोपवे योजनाओं पर फोकस है। जिस प्रकार से सड़कों पर यातायात के दबाव के साथ वाहन प्रदूषण बढ़ रहा है, उसका बेहतर विकल्प रोपवे व्यवस्था बन सकती है। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों, जहां सड़क का निर्माण नहीं किया जा सका है, उन क्षेत्रों की मुश्किलें भी रोपवे बनने से कम होंगी।
