उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त ऐसे मदरसों व अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को ही पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजन) का लाभ मिलेगा, जो विद्यालयी शिक्षा विभाग से संबद्ध होंगे। प्राधिकरण, इसके लिए विद्यालयी शिक्षा विभाग को पत्र भेजेगा। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डा पराग मधुकर धकाते की अध्यक्षता में विगत गुरुवार को संबंधित विभागों के साथ हुई बैठक का कार्यवृत्त सोमवार को जारी किया गया। इसके अनुसार उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत गठित अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेने के लिए अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता संबंधी नियमावली के अनुसार सभी अभिलेखों के साथ आवेदन करना होगा।अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के एक जुलाई से प्रभावी होने के मद्देनजर इसके प्रविधानों के क्रियान्वयन के दृष्टिगत आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके साथ ही संबद्धता के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले मदरसों के प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश शिक्षा विभाग को दिए गए।अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत गठित राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण प्रभावी हो जाएगा तो इसी दिन से मदरसा बोर्ड का अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही मुस्लिम समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदायों सिख, ईसाई, जैन, बौध व पारसी के शिक्षण संस्थान भी इस प्राधिकरण के दायरे में आ जाएंगे। राज्य में संचालित ऐसे मदरसे, जो शिक्षा विभाग के मानक पूरे कर रहे हैं, उन्हें भी मान्यता प्रदान करने के निर्देश बैठक में दिए गए। यह भी तय किया गया कि ऐसे मदरसे, जो मदरसा नाम के साथ जूनियर हाईस्कूल, हाईस्कूल व इंटरमीडिएट स्तर की मान्यता प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें शिक्षा विभाग के प्रचलित नियमों व मानकों के अनुरूप सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
