प्रदेश में हड़ताल, बंद, दंगा और उग्र विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की अब खैर नहीं। क्षति की भरपाई सीधे जिम्मेदार व्यक्तियों और आयोजकों से होगी। संपत्ति के नुकसान की गणना बाजार भाव से की जाएगी। यदि दोषी पक्ष वसूली से कन्नी काटता है तो सार्वजनिक स्थलों पर उसके पोस्टर लगाए जाएंगे। इनके प्रकाशन का खर्च भी उसकी व्यक्ति से लिया जाएगा।कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए सचिव गोपन शैलेश बगौली ने बताया कि नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कार्यक्रम के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ वचन-पत्र देना होगा, जिसमें आयोजक संभावित क्षति की पूरी जिम्मेदारी लेगा। प्रदर्शन के दौरान हथियार, ज्वलनशील पदार्थ और खतरनाक रसायनों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। घटनाओं की पारदर्शी जांच को हर थाने में वीडियोग्राफी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे दोषियों की पहचान और जिम्मेदारी तय करने में आसानी होगी।

