विरोध प्रदर्शन के लिए देहरादून आए सुप्रीम कोर्ट के वकील और सेव कॉन्स्टिट्यूशन के संयोजक मोहम्मद फरासा का कहना है कि यूसीसी लाने का मकसद ईवीएम के मुद्दे को डाइवर्ट करना है। भाजपा यूसीसी को इसीलिए ला रही है कि ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी को जा सके। उनका कहना है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड से मुसलमान को कोई नुकसान नहीं होने वाला है जबकि जनजातियों को इसमें शामिल न किये जाने से उनका नुकसान होगा।लिव इन रिलेशनशिप को सरकार मान्यता देने जा रही है। अगर सरकार महिलाओं को बहुविवाह से बचाना चाहती है तो लिव इन पर रोक लगाई जानी चाहिए, लेकिन सरकार यूसीसी के जरिए लिव इन को बढ़ावा दे रही है। फारसा का कहना है कि तीन तलाक का पहले से ही कानून बन चुका है तो यूसीसी में इसे लाने का कोई औचित्य ही नहीं है। हलाला भी इस्लामिक कानून में दुष्कर्म के समान है जिस पर सजा का प्रावधान है। वहीं इद्दत किसी वजह से ही की जाती है। किसी महिला का तलाक होने या उनके शहर की मौत होने पर 3 महीने से अधिक का समय इद्दत का रखा जाता है। यदि महिला गर्भवती है या अन्य किसी तरह की समस्या है तो इस अवधि में इसके बारे में पता चल सकता है।फारसा का कहना है कि यूसीसी लागू होने का नुकसान जनजातियों को उठाना पड़ेगा। यदि सरकार को उनके हितों की चिंता होती तो उन्हें यूनिफॉर्म सिविल कोड से अलग नहीं रखा जाता। जनजातियों की संपत्ति पर समूह विशेष की नजर है जिस कारण उन्हें यूसीसी से अलग रखा गया है लेकिन इसे मुसलमानों के खिलाफ दिखाया जा रहा है। जनजातियों की जमीन खत्म करने के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड लाया जा रहा है।
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February 25, 2026

