पलायन केवल खेती को प्रभावित नहीं कर रहा बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपराओं और पूर्वजों की विरासत को भी धीरे-धीरे समाप्त कर रहा है। योगी आदित्यनाथ अपने पैतृक गांव पंचूर में श्री विष्णु पंचदेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे।उन्होंने कहा कि जो खेत कभी फसलों से लहलहाते थे, आज वे झाड़ियों से पटे नजर आते हैं। कई गांवों में हालात ऐसे हैं कि खेतों में एक दाना अन्न तक पैदा नहीं हो रहा। लोग जंगली जानवरों को खेती छोड़ने का कारण बताते हैं लेकिन पहले भी गांवों में जंगली जानवर होते थे। उस समय लोग अधिक जागरूक और सजग रहते थे तथा खेती और परंपराओं से जुड़े रहते थे। उन्होंने किसानों को खेती के नए विकल्प अपनाने की सलाह दी। कहा कि यदि जंगली जानवर गेहूं, धान और दाल जैसी पारंपरिक फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो लोगों को बागवानी की ओर बढ़ना चाहिए।उन्होंने कहा कि बंजर खेतों को फिर से आबाद करना समय की आवश्यकता है। सरकार भी किसानों और ग्रामीणों को हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। जब खेत हरे-भरे होंगे, तभी हमारी संस्कृति, गांव और अस्तित्व भी सुरक्षित रह पाएंगे।योगी ने कहा कि यह हमारी आस्था, संस्कृति और दैवीय शक्तियों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से अपनी परंपराओं, देवस्थलों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का आह्वान किया।
